मृत सफाईकर्मियों के परिजनों को मुआवजा समय पर देना जरूरी : उच्च न्यायालय

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया है कि कार्य के दौरान मृत्यु होने पर सफाईकर्मियों के परिजनों को मुआवजे का भुगतान समय पर करना जरूरी है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार उच्च न्यायालय ने यह निर्देश तब दिया जब अदालत को बताया गया कि मृत सफाई कर्मचारियों के मुआवजे के 12 मामले लंबित हैं।

न्यायाधीश भारती एच डांगरे और मंजूषा ए देशपांडे की बेंच ने कहा, “हमें पता चला है कि मसला यह नहीं है कि मुआवजा कौन देगा। यह स्पष्ट है कि मुआवजा राज्य सरकार देगी और फिर वह जिम्मेवार ठेकेदार से वसूली कर सकती है लेकिन यह जरूरी है कि मृत सफाई कर्मचारियों के परिजनों को समय से मुआवजा मिले।”

अदालत ने कर्मचारी यूनियन से मैन्युअल स्कैवेंजिग रोकने के दिशानिर्देशों पर अमल और घायल कर्मचारियों के पुनर्वसन के बारे में सुझाव मांगे।

अदालत ने राज्य सरकार से यह भी जानना चाहा कि जून 2023 में ठाणे जिले के कल्याण में नाले की सफाई के दौरान करंट लगने से जिस कर्मचारी की मौत हुई थी, उसके परिवार को मुआवजा दिया गया है कि नहीं।

याचिकाकर्ता यूनियन ने निगम अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कथित उल्लंघनों की जांच कराने और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।

ट्रेड यूनियन श्रमिक जनता संघ ने तीन सफाई कर्मचारियों की मौत के मामलों का हवाला दिया जिसमें कल्याण डोंबिवली नगर निगम के ठेकेदार मेसर्स पवनी इंटरप्राइजेज के सफाई कार्य के दौरान ऋतिक कुरकुटे की मौत का मामला शामिल था।

वकील सुधा भारद्वाज ने यूनियन की तरफ से कहा कि यह मौतें सफाईकर्मियों की सुरक्षा और प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट मैन्युअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013 पर अमल को लेकर गंभीर चिंताओं को सामने लाती हैं।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के अनुसार कुरकुटे के परिवार के लिए 30 लाख रुपए का मुआवजा मांगा और उनकी मृत्यु की जांच की मांग की।

यूनियन ने सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षा उपकरणों की कमी के साथ नालों में उतरने से पहले सुरक्षा परीक्षण के अभाव का मुद्दा भी उठाया।

सरकारी वकील ओ ए चांदूरकर ने केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसके साथ 1993 से 2025 तक राज्यवार मौतों और मुआवजे का विवरण दिया गया था।

अदालत ने नोट किया कि महाराष्ट्र में मुआवजे के 12 मामले लंबित थे और उनमें से 11 में कोई मुआवजा नहीं दिया गया।

अदालत को बताया गया कि देश भर में 1993 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच 1327 सफाई कर्मचारियों की मौत हुई है।

सरकारी वकील ने कुरकुटे के परिवार को मुआवजा दिया गया है कि नहीं, इस बारे में सरकार से पता करने के लिए समय मांगा।

अदालत ने सफाई कर्मचारियों के हितों को लेकर यूनियन के अमल योग्य सुझावों को सरकार को लागू करने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 6 फरवरी को निर्धारित की।

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